Tuesday, November 13, 2018

सुप्रीम कोर्ट 49 पुनर्विचार याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर 49 याचिकाएं मंजूर कर ली हैं। इन पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि सुनवाई होने तक मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का फैसला बरकरार रहेगा। 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने 4-1 से फैसला दिया था। इसमें सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। पहले यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी।

पांच जजों की बेंच के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करती सभी याचिकाएं चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच के सामने रखी जाएंगी। इन याचिकाओं के अलावा फैसले पर पुनर्विचार के लिए तीन अलग-अलग याचिकाएं चीफ जस्टिस गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच के पास खुली अदालत में सुनवाई के लिए भेजी जाएंगी।

फैसले के पक्ष और विपक्ष में हो रहे प्रदर्शन
सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल में विरोध-प्रदर्शन हुए। कई संगठन कोर्ट के फैसले के खिलाफ तो कई इसके पक्ष में प्रदर्शन कर रहे हैं।

17 नवंबर से 2 महीने के लिए खुलेंगे द्वार
सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा का मंदिर 17 नवंबर को दो महीना के लिए खुलेगा। केरल सरकार इस सप्ताह शुरू हो रही तीर्थयात्रा से पहले सबरीमाला मंदिर से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक कर सकती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा- राम मंदिर के निर्माण के लिए सरकार को कानून बनाना चाहिए। राम जन्मभूमि की जगह अभी तक आवंटित नहीं की गई है। सबूतों ने पुष्टि की है कि उस जगह एक मंदिर था। अगर राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता तो मंदिर बहुत पहले बन गया होता। भागवत ने यह भी कहा कि सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परंपरा का ध्यान नहीं रखा। ये कई सालों से चली आ रही हैं लेकिन इनके मूल कारण का विचार ही नहीं किया गया।

पाक-इटली से आते हैं देश तोड़ने के विचार

दशहरे के मौके पर संघ मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि हमें शत्रुओं से बचाव का उपाय करना ही होगा। हमें यह करना होगा कि कोई हमसे लड़ने की हिम्मत ही न करे। प्रजातंत्र में आंदोलन सामान्य बात है, लेकिन पिछले दिनों हुए आंदोलनों में छोटी बातों को बड़ा किया गया। नारे लगे- ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, बंदूक की नली पर सत्ता हासिल करेंगे।’ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इसका राजनीतिक लाभ भी लिया जाता है। इसका नरेटिव सोशल मीडिया पर खूब चलता है। देश तोड़ने के विचार पाकिस्तान, इटली और अमेरिका से आते हैं। समाज की विषमता का लाभ उठाकर उपेक्षित लोगों को राजनीतिक लोग अपने लिए बारूद की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जरिए समाज में प्रचलित श्रद्धाओं और नेतृत्व को ढहाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माओवाद तो हमेशा से अर्बन ही रहा है।

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